मध्यम आवृत्ति प्रेरण भट्टी एक प्रेरण तापन उपकरण है जो धातुओं को पिघलाने के लिए विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत का उपयोग करती है। इसमें तीव्र तापन गति, उच्च तापीय दक्षता और नियंत्रित तापमान जैसे महत्वपूर्ण लाभ हैं।
I. कार्यप्रणाली
फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, जब एक प्रत्यावर्ती धारा एक प्रेरण कुंडली से गुजरती है, तो यह धातु आवेश में एक प्रेरित धारा (भंवर धारा) उत्पन्न करती है, जो बदले में ऊष्मा उत्पन्न करती है जिससे तापन और गलनांक प्राप्त होता है।
II. मुख्य लाभ
| लाभ | उदाहरण देकर स्पष्ट करना |
|---|---|
| तेज़ तापन गति | विद्युत घनत्व 500-1000 किलोवाट/टन |
| उच्च तापीय दक्षता | 70% से अधिक |
| सटीक तापमान नियंत्रण | निरंतर समायोज्य शक्ति |
| कम धातु दहन | कम ऑक्सीकरण, अधिक उपज |
| पर्यावरण सफाई | कोई दहन निकास गैस नहीं |
III. अनुप्रयोग उद्योग
- फाउंड्री उद्योग: तन्य लोहे और धूसर ढलवां लोहे का गलाने का कार्य
- अलौह धातुएँ: तांबा और एल्युमीनियम मिश्रधातु का गलाने का कार्य
- बहुमूल्य धातुएँ: शुद्ध सोना और चांदी
- फोर्जिंग उद्योग: बिलेट्स का इंडक्शन हीटिंग
हमारे मध्यम आवृत्ति वाले भट्टी उपकरण में पूरी तरह से डिजिटल नियंत्रण तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च गलाने की दक्षता और कम ऊर्जा खपत होती है।

