मध्यम आवृत्ति प्रेरण भट्टी: कार्य सिद्धांत और प्रमुख लाभ

2026-05-17

मध्यम आवृत्ति प्रेरण भट्टी धातुओं को पिघलाने के लिए विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का उपयोग करती है। पारंपरिक प्रतिरोध भट्टियों और ईंधन भट्टियों की तुलना में, मध्यम आवृत्ति भट्टियां तेजी से गर्म करने, उच्च तापीय दक्षता, सटीक तापमान नियंत्रण और कम धातु हानि प्रदान करती हैं।

काम के सिद्धांत

फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम के आधार पर, जब प्रत्यावर्ती धारा किसी प्रेरण कुंडली से गुजरती है, तो यह अंदर मौजूद धातु आवेश में भंवर धाराएं उत्पन्न करती है, जिससे ऊष्मा उत्पन्न होती है और धातु पिघलती है।

सिस्टम के घटक:

  • मध्यम आवृत्ति विद्युत आपूर्ति (मुख्य आवृत्ति को मध्यम आवृत्ति में परिवर्तित करती है)
  • प्रेरण कुंडली (तांबे की नली की वाइंडिंग)
  • दुर्दम्य परत (क्वार्ट्ज रेत की भराई या पूर्वनिर्मित क्रूसिबल)
  • शीतलन प्रणाली (जल-शीतित केबल, प्रेरण कॉइल)
  • हाइड्रोलिक टिल्टिंग डिवाइस
  • तापमान मापन और नियंत्रण प्रणाली

मुख्य लाभ

फ़ायदाविवरण
तेज़ तापविद्युत घनत्व 500-1000 किलोवाट/टन
उच्च तापीय दक्षता70% से अधिक
सटीक तापमान नियंत्रणनिरंतर समायोज्य शक्ति
कम धातु हानिकम ऑक्सीकरण, अधिक उपज
पर्यावरण के अनुकूलकोई दहन निकास गैस नहीं

आवेदन

  • फाउंड्री: तन्य लोहा, धूसर लोहा पिघलाना
  • अलौह धातुएँ: तांबा, एल्युमीनियम मिश्र धातु का पिघलना
  • कीमती धातुएँ: सोना, चांदी का शुद्धिकरण
  • फोर्जिंग: बिलेट प्रेरण तापन

हमारी मध्यम आवृत्ति वाली भट्टियों में पूर्णतः डिजिटल नियंत्रण तकनीक मौजूद है, जो उच्च पिघलने की दक्षता, कम ऊर्जा खपत और आसान संचालन प्रदान करती है।

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